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Yoga & Spirituality

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Saturday 24 October 2015

सूर्य नमस्कार के अनेक फायदे

यह एक सच्ची कहानी है। एक दिन राहुल पार्क में योग कर रहा था। उसने देखा की एक बूढा व्यक्ति भी योग कर रहा है। कुछ समय के बाद राहुल थक गया योगासन करते करते। उसने योग सीखा था एक किताब से जो उसको उसके दादाजी ने दी थी। दादाजी बहुत सालों से योगाभ्यास करते थे और उसका बहुत लाभ भी उठा चुके थे। तो राहुल उनसे प्रेरित हो कर योगब्हस शुरू करने लगा। राहुल की उम्र कुछ १८ साल थी और वह एक स्कूल में पड़ता है। उसके स्कूल में वो सबसे शक्तिशाली बच्चों में से मन जाता था। लेकिन उसने जब इस बूढ़े व्यक्ति को योग करते देखा तो उसके पर्चाखे उड़ गए!

ताहुल को किताब में यह असं मिले, जिन्हें वो रोज़ अभ्यास करता था : 

भुजंगासन, उत्‍तानासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तानासन, बालासन

तभी उसने देखा की ये वृद्ध व्यक्ति जूच अलग ही प्रकार का योग कर रहा है। उसको यह देख के अश्कार्य हो गया। राहुल से अब रहा नहीं गया और वो भाग कर अपने घर गया और दादाजी की किताब उठा के ढूढने लगा की उसने क्या देखा आज। ध्यान से ढूँढने पे उससे पता चले की वह सूर्य नमस्कार कर रहा है। इससे देख के राहुल प्रेरित हो गया और किताब पढ़ के अपने आप को सूर्य नमस्कार सिखाने लगा। ज्यादा समय नहीं लगा इससे सीखने में। अगले दिन वो सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने लगा लेकिन उसने देखा की वृद्ध व्यक्ति कुछ अलग ही तरह से अभ्यास कर रहा था सूर्य नमस्कार का। उसने जा के पुछा की आखिर आप सूर्य नमस्कार अलग तरह से क्यों कर रहे हो?

तो उस व्यक्ति ने कहा "सूर्य नमस्कार के फायदे तो बहुत हैं लेकिंग इससे सही तरह से करने से ही यह फायदे मिलते हैं" यह कहकर उसने राहुल को सही तरीके से सूर्य नमस्कार करने की विधी सिखाई। राहुल को देख कर अस्चर्य हो गया की सही तरह से सूर्य नमस्कार करने से उसको फायदे दिखने लगे अपने जीवन में। स्कूल में उसके मार्क्स बढ़ गए। वोह अपने स्कूल का सबसे गौरवशील और शक्तिशाली विध्यार्ती बन गया। यहाँ तक की उसको सभी अध्यापक भी प्रशंसा करने लगे! 

तो यह कहानी हमें सिखाती है सही तरह से अब्यास करने से योग के पूरे फायदे उठाये जा सकते हैं। गलत प्रकार से योग अभ्यास ना करें क्योंकि इसका गलत प्रभाव हो सकता है। इस कहानी से हम सब सीखते हैं किताब से न सीखें लेकिन एक शिक्षक की खोज करें! 

Thursday 22 October 2015

भगवान कृष्ण का इतिहास

कृष्णा अपनी संश्लेषण के भीतर मनुष्य की आत्मा के सारे पहलुओं को बढ़ाने में अपनी सार्वभौमिकता में उपनिषदों दर्शन में धर्म प्रतिनिधित्व करता है। पश्चिमी उपनिषदों बुद्धिजीवियों गंगा के मैदानी इलाकों में वह जंगल विश्वविद्यालयों (आश्रम) की स्थापना कर रहे थे जब यह 4 सहस्राब्दी ई.पू., का अंत हो गया। उन भीष्म के दिनों Girivarya या राजगृह में जरासंध जैसा खूंखार रजा था जिसने हस्तिनापुर, द्रुपद यज्ञ शिवसेना, विदेशी आक्रमणों से परेचान्न कर दिया था। निष्कासित कर दिया आर्यों के आधिपत्य कैस्पियन सागर तक फैली हुई है।

(ग्रेटर भारत - Bharatavarsha)। भरत Khanda (उप-महाद्वीप) हालांकि आंतरिक कलह से ग्रस्त था। वे नस्लीय की तुलना में अधिक भ्रातृवध से संबंधित थे। घृणा, अहंकार, भावना और जलन कारण, सत्य और धर्म पर पूर्वता ले लिया है। पुजारियों द्वारा की सलाह दी योद्धा वर्ग मामलों के शीर्ष पर थे। Jarasandha और कंस की तरह अंधविश्वासी शासकों थे। शराब पीने और जुआ भी शामिल है जो सात सामाजिक बुराइयों (सप्त व्यास) व्यापक रूप से थे। मामलों की इस उलझन में राज्य में किया गया था, तो यदु के अंधेरे नायक दृश्य पर दिखाई दिया।

सभी के लिए वह यशोदा के युवा और आनंदमय उपद्रव और सौंदर्य और खुशी का एक शाश्वत बच्चा था। कुछ करने के लिए वह श्री कृष्ण हमें (कर्तव्यों) कर्मों का पता लगाने के लिए और जीवन की पहेली में महारत हासिल करने के लिए, बाहर काम करने के लिए चाहते थे और वह खुद कर्मयोगी थे।

उन्होंने कहा कि वीरता, पौरूष और पुण्य बहुत अच्छा लगा और किन्नरों के रूप में इन से रहित लोगों को बुलाया। हम पहले ऋग्वेद में उसके बारे में सुना है। उन्होंने कहा कि इंद्र का एक दानव, दुश्मन बताया गया था। हम बाद में एक  कबीले के सत्वाका के रूप में उसके बारे में सुना। उन्होंने कहा कि हथियार गदा एक विशेषज्ञ था जो नाम बलराम का था जो कृष्ण के बड़े भाई थे। बलराम भी कृषि के बढ़ते महत्व का संकेत हल के साथ एक आदमी के रूप में हमारे लिए परिचित है। नागा मुख्य अरायक की बेटी के पोते थे। वे बड़े भूमि की पटरियों और व्यापारिक समुदाय (वैश्य) के पेशे को चुना था, जो मवेशियों के झुंड के मालिक सरदार, वासुदेव के पुत्र थे।

वैसे कृष्ण के बारे में आप यह ब्लॉग भी पढ़ सकते हैं। यहाँ कृष्ण की अधभुत 30 लीलाएं दशाई गयी हैं। शायद पूरे इन्टरनेट पर यह सबसे अच्छे लेख हैं।

कृष्णा और इंद्र के बीच एक लड़ाई के बारे में बताया जाता है। हम यज्ञों में पशु और अन्य घरेलू पशुओं के बलिदान के बारे में उनकी अस्वीकृति के रूप में व्याख्या किया है। उन्होंने कहा कि एक देहाती और कृषि समुदाय के लिए पशु, पहाड़ों और जंगलों के महत्व के लोगों को राजी कर लिया। कालिया (पांच अध्यक्षता में) कोबरा को जीतने और उन्हें मारने के बिना यमुना के लिए अपनी पत्नियों के साथ कृष्ण की कहानी यही है। धाधुंध हत्या करने के साथ ही नाग की पूजा के लिए विरोध का प्रतीक है। कृष्णा यम के निवास के लिए जा रहे हैं और अपने गुरु सांदीपनी के मृत बेटे को लाने के लिए, जीवन में वापस, उसकी परंपरा बाद में भगवान मौत की, यम के रूप में तब्दील और  कुछ राजा को हराने के रूप में व्याख्या की जा सकती है। 

कृष्णा यज्ञों की गिरावट का कारण है और उनके साथ जुड़े अमानवीय और बेकार अनुष्ठानों की रफ्तार कम करने की कोशिश की। लोगों के जीवन के उनके विचार की सराहना की। कई अविश्वसनीय और सुपर मानव कहानियाँ एक आभारी लोगों द्वारा उसे दौर बुने जाते थे। हीरो पूजा यह किसी भी अच्छा करने के लिए हमें नहीं किया है उप-महाद्वीप के लोगों के साथ एक कमजोरी है। फिर भी यह है कि आज भी बेरोकटोक जारी है।

पोस्ट क्रिस्चन युग में भक्ति के रूप में जाना आराधना और भक्ति दुर्भाग्य से एक इंसान के रूप में उसे अध्ययन करने के लिए और अपने जीवन से लाभान्वित करने के लिए अवसर के लिए हमें वंचित किया है। नरकासुर, Pragjyotishapura के राजा और 16,000 अपहरण हुई महिलाओं की रिहाई पर कृष्णा की जीत का पुराणों बात करते हैं जिसे  क्रूर तानाशाह द्वारा बंदी बनाकर रखा गया था।