यह एक सच्ची कहानी है। एक दिन राहुल पार्क में योग कर रहा था। उसने देखा की एक बूढा व्यक्ति भी योग कर रहा है। कुछ समय के बाद राहुल थक गया योगासन करते करते। उसने योग सीखा था एक किताब से जो उसको उसके दादाजी ने दी थी। दादाजी बहुत सालों से योगाभ्यास करते थे और उसका बहुत लाभ भी उठा चुके थे। तो राहुल उनसे प्रेरित हो कर योगब्हस शुरू करने लगा। राहुल की उम्र कुछ १८ साल थी और वह एक स्कूल में पड़ता है। उसके स्कूल में वो सबसे शक्तिशाली बच्चों में से मन जाता था। लेकिन उसने जब इस बूढ़े व्यक्ति को योग करते देखा तो उसके पर्चाखे उड़ गए!

ताहुल को किताब में यह असं मिले, जिन्हें वो रोज़ अभ्यास करता था : 

भुजंगासन, उत्‍तानासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तानासन, बालासन

तभी उसने देखा की ये वृद्ध व्यक्ति जूच अलग ही प्रकार का योग कर रहा है। उसको यह देख के अश्कार्य हो गया। राहुल से अब रहा नहीं गया और वो भाग कर अपने घर गया और दादाजी की किताब उठा के ढूढने लगा की उसने क्या देखा आज। ध्यान से ढूँढने पे उससे पता चले की वह सूर्य नमस्कार कर रहा है। इससे देख के राहुल प्रेरित हो गया और किताब पढ़ के अपने आप को सूर्य नमस्कार सिखाने लगा। ज्यादा समय नहीं लगा इससे सीखने में। अगले दिन वो सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने लगा लेकिन उसने देखा की वृद्ध व्यक्ति कुछ अलग ही तरह से अभ्यास कर रहा था सूर्य नमस्कार का। उसने जा के पुछा की आखिर आप सूर्य नमस्कार अलग तरह से क्यों कर रहे हो?

तो उस व्यक्ति ने कहा "सूर्य नमस्कार के फायदे तो बहुत हैं लेकिंग इससे सही तरह से करने से ही यह फायदे मिलते हैं" यह कहकर उसने राहुल को सही तरीके से सूर्य नमस्कार करने की विधी सिखाई। राहुल को देख कर अस्चर्य हो गया की सही तरह से सूर्य नमस्कार करने से उसको फायदे दिखने लगे अपने जीवन में। स्कूल में उसके मार्क्स बढ़ गए। वोह अपने स्कूल का सबसे गौरवशील और शक्तिशाली विध्यार्ती बन गया। यहाँ तक की उसको सभी अध्यापक भी प्रशंसा करने लगे! 

तो यह कहानी हमें सिखाती है सही तरह से अब्यास करने से योग के पूरे फायदे उठाये जा सकते हैं। गलत प्रकार से योग अभ्यास ना करें क्योंकि इसका गलत प्रभाव हो सकता है। इस कहानी से हम सब सीखते हैं किताब से न सीखें लेकिन एक शिक्षक की खोज करें!